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بقلم نرمين حمدي
الفصل 26 — رواية غرام نمر الصعيد الفصل السادس والعشرون 26 - بقلم نرمين حمدي
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عن الرواية
غرام: اتجوزوا إزاي يا بابا وأنا مخطوبة لواحد تاني وبحبه وهو كمان بيحبني وفرحنا كمان أسبوع. صابر: وإنتي عايزاني أقول ليونس بيه النمر؟ لأ، إنتي عايزة تدفنيني بالحياة. غرام: يا بابا كفاية خوف بقى، أنا مش هتجوز غير أدهم اللي هو ابن أخوك لو حضرتك ناسي، ولو خايف تقول ليونس بيه أقوله أنا. صابر ضربها بالقلم: اللي بقوله أنا هو اللي هيتنفذ، ما هو أدهم بتاعك ده مش هينقذنا لو يونس بيه زعل، وإنتي عارفة يعني إيه زعل حد من بيت النمر، أسياد البلد اللي إحنا متحامين في ضلهم. غرام بعياط: يوووه، أنا زهقت، هما عشان...
رواية غرام نمر الصعيد الفصل السادس والعشرون 26 - بقلم نرمين حمدي
يونس: عمل إيه وبتاع إيه وإنت إيه اللي عرفك عاد؟
الرجل: بنتي ماتت من سنتين وكان بيحصلها نفس اللي بيحصل لمراتك، فلفينا على كل الدكاترة وكلهم كانوا بيقولوا نفس الكلام "مفيش سبب طبي"، لحد ما بعدين اكتشفت إنها كانت مسحورة.
يونس: أنا اتصدمت، ما اتخيلتش إن الأذى ممكن يوصل لحد كده. ما كانش معايا وقت، اتصلت بورد وجولتلها تجلب الأوضة عاليها واطيها وتدور على العمل ده وتحرقه قبل ما يفوت الأوان. وفعلاً ورد دورت لحد ما لقت العمل وحرقته وغرام خفت وبقت وسطنا.
جليلة: إيه ده يا غرام؟ كنتِ عارفة بكل ده ومخبية علينا؟
يونس: لأ، هي مصدومة زيكم، أنا ما فهمتهاش أي حاجة.
جليلة (تبكي): أكده يا غرام؟ تعملي فينا كده؟ أنا كنت هموت من الزعل عليكي.
غرام (تحتضنها وتبكي): الشر كان محاوطها من كل ناحية يا ماما. جليلة، كان لازم نعمل كده.
الكل كانوا بيعيطوا.
ورد احتضنت غرام وهمس كمان.
همس: حمد لله على سلامتك، الحمد لله إني رجعت أشوفك تاني.
غرام (تمسح دموعها): خلاص بقى كفاية عياط.
يونس جذبها إليه ومسح بيده على شعرها ونظر إليها وعيونه مليانة حب: حمد لله على سلامتك يا غرامي، إياكي تفكري تسبيني في يوم من الأيام. برغم إني كنت عارف إنك عايشة...
قاطعته غرام بحضن وعياط: بحبك يا نمر.
سيف: احممم، طيب إيه؟
عثمان: يا أخي، دا أنا صدقتك وأنت بتقول "لا يا غراااام، متسبينيش، هتسبيني لمين؟ دا أنت طلعت معلمي".
يونس يضحك: كان لازم أعمل كده. ثم ينظر لغرام: بس كل كلمة كانت من قلبي.
عثمان: طيب يا حبيبي، عوضونا بقى على الطفل اللي راح.
غرام تنظر ليونس باستعباط: وهو راح فين يا يونس؟!
يونس بضحك: براحة عليهم، مش كده.
زين: لاااااه! ما تقولوش إنه لسه عايش.
غرام تنظر ليونس: وهو اللي يبقى بـ... باباه؟ يونس النمر؟ حد يستجري يقرب منه؟
جليلة أمسكت غرام بفرحة كبيرة: يعني... يعني أنتِ لسه حامل؟
غرام بفرحة تهز رأسها بالموافقة.
عثمان: إنتوا هتجننوني! كيف والدكتورة قالت إنها أجهضت ومش هتقدر تخلف تاني؟
قاطعه يونس: في يوم أنا كنت رايح لأوضة فريدة، فالباب كان موارب وشوفت صباح بتديها شريط حبوب. وتاني يوم دورت كويس على الشريط ده، خاصة في دولابها، لأنها عارفة كويس إني مش بفتح دولابها نهائي. فلقيت الشريط. بعته بسرعة لدكتور صاحبي، قالي إنها حبوب إجهاض من الدرجة الأولى، يعني لو الحامل أخدت واحدة بس تضمن الإجهاض. ففهمت إن الحبوب دي لغرام وإنها ناوية تسقطها. فجولت للدكتور: "عايز زي الحبوب دي بس متعملش حاجة". جاب لي صعب، بس عندي زيها تركيز المادة الفعالة فيها أعلى، بمعنى إن الحباية الواحدة متأثرش، لكن لو أخدت تلاتة هتسقط. أخدتها وبدلتها مع الشريط اللي عندها. ونبهت على نعيمة إن فريدة متجربش على أي حاجة في المطبخ، خاصة لو حاجة تخص غرام. أما أنا فكنت بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... 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بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... 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بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... بـ... 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