فجأة سمعوا صوت جاي من غرفة أنس. أنس قام جري على الصوت، والجميع رآه. حاول كسر الباب. هنا كانت الصدمة، غزال في كدمات في وشها، شعرها متبهدل، وشهد واقفة مرعوبة. أنس اتجه ليها وحضنها. غزال بدموع: "أنا معملتش حاجة. ليه كل ده؟ ليه تعملي فيا كده؟ وشي اتدمر. أنا كنت اعتبرتك أختي، وقلت إني مش هاسمح لأنس إنه يطلقك. تقومي تتهجمي عليا يا شهد؟ أخص عليكي." شهد واقفة مذهولة ومش عارفة تقول إيه. بهجت: "الكلام ده صحيح يا شهد؟
إنتي فعلاً ضربتيها؟ اتكملي يا بنتي، متخفيش. محدش يقدر يعملك حاجة طول ما أنا عايش." غزال مسكت في أنس بخوف: "مش عايزة أشوفها. هـ... ها تقتلني يا أنس. أنس، آسفة يا شهد. لو وجودي مضايقاكي، أنا مستعدة أسيب البيت حالا. بس بلاش تقتـلني، أرجوكي. أنا معملتش حاجة لكل ده. أنا اتجوزت اللي بحبه." الأم مسكت شهد بحنان: "تعالي يا حبيبتي. ربنا على المفتري." (قالت كده وهي بتنظر لغزال) وخرج الكل من الغرفة. ***
قفلت الباب وقالت بابتسامة: "كده نقدر نتكلم ونتفاهم. إنتي أخدتي جوزي؟ يا ترى أهلك... أووه، نسيت إن مامتك سابتك وإنتي صغننة وباباكي على طول في الشركة. الشركة اللي عملها عشان يخبي شغله." "بس معلش، هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هــ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هــ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هــ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هــ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هــ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ... هـ...
تابعنا وما يفوتك جديد
اختر المنصة اللي تناسبك وتوصلك الفصول أول بأول.
التعليقات (0)
جاري تحميل التعليقات...
لا توجد تعليقات بعد
كن أول من يشارك برأيه!