صرخ غيث باسم تقي بصوت عالٍ اهتزت له أرجاء القصر وكأنه بركان وانفجر. ليقترب منهم بخطوات واسعة ويجذب تقي، والتي كانت تتمسك بأمجد بخوف وهي تعلم أن غيث لن يرحمها إطلاقًا بسبب فعلتها.
لتجد أمجد مطروحًا أرضًا إثر لكمة غيث العنيفة لوجهه. شهقت كل من ميان وتقي بفزع، وكادت ميان أن تهرول نحوه لتجد يدًا تقبض على معصمها بقوة. لتتطلع إليه وتجده يونس وينظر إليها نظرات تحذيرية، شرارات منطلقة من عينيه نحوها وكأنه يحذرها الاقتراب وإلا ستحرقها نار غيرته. ميان بصراخ: سيبني يا يونس، أوعى سيبني أروح له. لم يرد، وإنما تطلع أمامه بجمود نحو غيث، والذي اقترب من تقي وجذبها من ذراعيها بقوة حتى أحست أنه سينخلع.
غيث بصوت أجش: مين ده؟ تقي بخوف: ده... نهض أمجد سريعًا ليجذب تقي خلف ظهره ويصرخ بقوة: أنت اتجننت يالا ولا إيه؟ غيث ببرود وهو يُفلت يديه: تؤ تؤ، ده أنت اللي شكلك اتجننت. وكاد أن يلكمه مرة أخرى لتصرخ تقي بزعر. تقي: غيث، أمجد ابن خالتي وزي أخويا. وقفت يداه في الهواء ليهتف بصدمة: أخوكي!!! تقي وهي تتخطى أمجد وتقف أمام غيث: أيوه زي أخويا يا أستاذ غيث، ويبقى ابن خالتي الله يرحمها. أمجد بسخرية: هو ده جوزك؟ غيث وهو يجذبها
من معصمها لتقف بجانبه: أه جوزها، مالك قرفان كده ليه؟ أمجد بسخرية أكبر: لا، واضح إن في عندكم إكرام ضيوف أوي! غيث بثبات وصوت رجولي: اتفضل. كانت تقي تقف بجانبه وملامح وجهها توحي بذلك الألم الذي تشعر به إثر ضغط غيث على معصمها بقوة، ولكنها لم تتفوه خوفًا منه، فغيرته قاتلة. دلف أمجد ليجلس ببرود، ونظرات غيث ويونس الحارقة تُشعل القصر، ولكن لم تُشعله.
أمجد بجدية: أنا أمجد ابن خالتهم، وأبقى أخو ميان في الرضاعة. ومش متضايق من موقفك يا أستاذ غيث، حقك تغير على مراتك. بس من الواضح إن أخو حضرتك مش ناوي يخليني أسلم على أختي. سبقته هبة قائلة بابتسامة: لا طبعًا، مين قال كده؟ محدش يقدر يمنعك. لتنظر إلى ميان، والتي تتطلع إليها برجاء، لتهتف بصرامة: روحي يا ميان يا بنتي، سلمي على أخوكي. التفتت ميان بوجهها إلى يونس، والذي كان وجهه أحمر من الغضب ولم يتطلع إليها بعد.
أمجد بعتاب: إيه يا ميان، خايفة تسلمي على أخوكي؟ لم تنتظر ميان أكثر من ذلك، وإنما هرولت إلى أمجد واندفعت في أحضانه تضمه بقوة وتبكي بعنف، وكأنها كانت تنتظر وجود من يفهمها دون حديث. كان يونس يشتعل بداخله، صدره يهبط ويصعد، ويقبض على كف يديه بقوة، ليقسم في داخله أن يعاقبها أشد عقاب. أمجد برقة: ميان حبيبتي، اهدي يا روحي عشان خاطري. ابتعدت عنه ميان لتنظر إليه بدموع وكأنها طفلة صغيرة تشكي والدها: شـ...
شوفت يا أمجد، بابا مات وسابني إزاي؟ حـ... حتى أنت سبتني ومشيت، مبقاش ليا حد. إلى هنا وكفى! لم يتحمل يونس أن تضم غيره، لم تتحمل أن تشكي لغيره، لم يتحمل أن تشعر بتلك الوحدة. لينهض وهو يهتف بغضب: يعني إيه مبقاش ليكي حد؟ أومال أنا لازمتي إيه يا هانم! انتفضت ميان بفزع عندما هب واقفًا وصرخ بتلك الطريقة، لتختبئ في حضن أمجد، لتضمها بقوة ويهدأها.
أمجد: ياريت يا أستاذ يونس، بلاش تتعصب عليها. ميان بتخاف من الزعيق ده، كفاية اللي هي فيه. وبعدين حضرتك بتقول أومال أنا بعمل إيه؟ الصراحة اللي أنت بتعمله ده ميطمنهاش إطلاقًا، ده يرعبها منك أكتر! أغمض يونس عينيه بغضب، وكان على وشك أن يقتله، ولكن هو في الحقيقة بداخله اقتنع بحديث أمجد. غيث بهدوء: نورتنا يا أستاذ أمجد. تطلع أمجد إليه،
لينهض وهو يهتف بغيظ: تمام، همشي دلوقتي. بس يكون في علمك، منك ليه، أنا مش هسيب أخواتي على ذمتكم. مينفعش أسيب قطط بريئة وسط وحوش زيكم! لم ينتظر ردًا، وإنما خرج سريعًا، وكادت ميان أن تهرول خلفه ليكان... يونس بحدة: مكانك. ميان بعصبية: أنت عايز إيه مني يا أخي؟ طلقني بقي، أنا مش عايزاك، هو بالعافية. تقي وهي تقترب من ميان وتهدأها: اهدي يا ميان، مينفعش كده. ميان بنرفزة وقد تساقطت دموعها: لا، مش ههدي غير لما يطلقني.
يونس ببرود: خلصتي؟ لم ترد، وإنما تطلعت إليه بشراسة، وكادت أن ترد ليقطعها صياح فتاة باسم يونس. التفت يونس ليجدها يارا خطيبته. يارا: يونس حبيبي. حمحم يونس بخجل من وجود والدته وشقيقه الأكبر، ليهتف بصوت خشن: عاملة إيه؟ يارا: الحمد لله. لتلتفت إلى عائلته بابتسامة صفراء: ازيكم؟ هبة وهي تنهض بقرف: الحمد لله، عن إذنكم أنا هطلع أريح شوية. غيث وهو يجذب تقي من معصمها ليهتف بصوت أجش: أنا طالع أوضتي.
ليذهب هو وتقي. كل ذلك وميان تتطلع إلى يارا بكره، فهي بالتأكيد خطيبته. يارا بغرور: أنتي إيه اللي موقفك هنا؟ يالا ادخلي اعمليلي فنجان قهوة. كادت أن تعترض لتصدمها جملة يونس ببرود: خليهم اتنين، ومتتأخريش بدل ما أنتي عارفة وشي التاني. ليجذب كف يارا ويدلفوا إلى غرفة مكتبه ليغلقه في وجهها بقوة. ميان بانكسار لنفسها: أنا بقيت خدامة بالنسباله. لتهتف بدموع حارقة: لاعاش ولا كان اللي يعاملني كده، أنا مش هفضل هنا لحظة.
لتهرول سريعًا إلى غرفتها وتحضر حقيبتها، لتخرج وهي تبحث بعينيها يمينًا ويسارًا ولم تجد أحدًا، لتهبط ببطء وتخرج من الفيلا متجهة إلى منزلهم، وهي لا تعلم أنها بذلك فتحت أبواب الجحيم. في مكان آخر، كان يسير أمجد بثقته المعتادة، ليلفت انتباهه فتاة تلعب مع الأطفال بالكرة، وهي تهرول وتبتسم بطفولة، وكأنها طفلة في العاشرة من عمرها وليست بفتاة في أوائل العشرينيات.
ليبتسم على تلك الطفلة الكبيرة، ولكن امتعضت ملامحه عندما هتف شاب باسمها، لتلتفت إليه وتذهب نحوه. اقترب منهم ليقف خلف شجرة بجانبهم، ولا يعلم لماذا دفعه فضوله لاستماع حديثهم. الشاب: صبا، أنا آسف. صبا ببرود: آسف على إيه؟ حمزة: صبا، أنا بحبك. صبا بصدمة: ها؟ حمزة: صدقيني بحبك، واللي حصل كان غيرة عليكي. صبا وقد احمر وجهها خجلًا لتهتف بتوتر: حـ... حمزة، مينفعش وقفتنا كده. حمزة بحب: خلاص، روحي يا قلب حمزة.
كادت أن تذهب ولكنه صاح باسمها، لتلتفت إليه لتتفاجئ بقبلته على وجنتيها سريعًا، ليهتف: هتوحشيني. هرولت صبا سريعًا من أمامه، ودقات قلبها تكاد أن تتوقف من الفرحة. كل ذلك وأمجد يقف خلف الشجرة وقد تحرك قلبه بعنف وغيره. غيرة!!! يغير على فتاة لم يتحدث إليها ولم يراها سوى الآن! فهو في الحقيقة استغرب حاله. لينفض تلك الأفكار من رأسه ويغادر نحو منزله.
في الفيلا، وخاصة في غرفة تقي، كانت تجلس تقي على طرف الفراش وتتطلع إلى غيث، والذي يجلس أمامها بجمود وملامحه لا توحي بشيء سوى البرود. تقي بتوتر: غـ... غيث. غيث: سامعك. تقي: أنا آسفة لو ضايقتك. غيث بهدوء: وأعمل إيه بأسفك؟ نار غيرتي هتنطفي؟ تقي بسرعة: طـ... طب أعمل إيه عشان تسامحني؟ أنا مستعدة أعمل أي حاجة. لـ... ليختنق صوتها بالدموع: بس بلاش تقسي عليا، أنا دلوقتي مليش غيرك.
نهض غيث بثبات ليجلس بجانبها على الفراش، وهو يجذب رأسها إلى صدره، وقد تبخرت وعوده أن يعاقبها على فعلتها لمجرد دموعها. رَق قلبه، فكيف لا وهي عشق ذلك الغيث؟ غيث بهدوء: تعرفي إني كنت ناوي أعاقبك أشد عقاب. رفعت تقي وجهها وهي تهتف بذعر: لا والنبي يا غيث، لا بلاش تقسي عليا. غيث برقة: اتبخرت وعودي يا تقي، اتبخرت بمجرد ما شفت دموعك.
ليتحول صوته إلى الحدة: بس وقسما بالله لو حصل كده تاني، أنا ما هتنازل عن عقابي ليكي مهما كان، فاهمة؟ تقي وهي تضع رأسها على صدره: فاهمة. بس ممكن تحضني أوي. ضمها غيث بقوة ليقبل أعلى رأسها بحب. انتفضوا على صوت يونس وهو يصرخ باسم ميان. تقي: إيه ده؟ في إيه؟ غيث وهو ينهض ليتجه نحو الباب: مش عارف. غيث ليونس: في إيه يا يونس؟ يونس بغضب: فين ميان؟ تقي: يعني إيه فين ميان؟ هتلاقيها في أوضتها.
يونس بغضب وصراخ: أختك مش في الأوضة وهدومها مش هنا كمان. تقي: إيييه! يارا: ما تفهمني يا يونس، مين ست زفتة دي؟ تقي بغضب: متقوليش على أختي زفتة يا بتاعة إنتي، ثم إنتي اللي مين؟ يارا: بتاعة!!! أنا خطيبة يونس. تقي بصدمة: نعممممم!!! يونس بصراخ: مش وقته، فين ميان؟ تقي: تلاقيها راحت على بيتها. لم ينتظر يونس، وإنما هبط سريعًا ليخرج من الفيلا، يبدو أنه سيتجه إليها. تقي بخوف: غيث والنبي الحقه، ليعمل فيها حاجة.
هرول غيث خلفه، ليتبقى تقي وتلك يارا. يارا بقرف: هو ماله كده؟ قلقان على حتة خدامة. تقي بغضب: أختي مش خدامة يا بتاعة إنتي، أختي مرات يونس بيه يا عينيا. يارا بصدمة: مررراته!!! تقي: بقولك إيه، ابعدي عن وشي، مش وقت دهشة هو. لتهبط وتتركها وسط صدمتها. أثناء سير يونس وخلفه غيث، لمح تجمع من الناس حول مكان ما. لا يعلم لماذا انقبض قلبه بخوف، لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
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لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ... لـ...
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